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स्वतंत्र भारत में ‘जेन-जी’ की ताकत को सबसे पहले जेपी ने पहचाना था: प्रो. शर्मा

दीपक कुमार। विशेष संवादाता

भिलाई। सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को श्रद्धांजलि सभा और वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत जेपी प्रतिमा स्थल पर श्रद्धांजलि सभा से हुई, जहां राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और ‘जयप्रकाश नारायण अमर रहें’ के नारे लगाए। इसके उपरांत एचएससीएल कॉलोनी, रूआबांधा में ‘यूथ फॉर डेमोक्रेसी—लोकतंत्र के लिए युवा शक्ति का आह्वान जेपी’ विषय पर वैचारिक गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए वक्ताओं ने जेपी के विचारों और उनके आंदोलन की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि प्रो. डी.एन. शर्मा ने कहा कि जेपी पर गांधी, मार्क्स और लोहिया—तीनों का गहरा प्रभाव था। उन्होंने इन विचारधाराओं को मिलाकर ‘संपूर्ण क्रांति’ का स्वरूप दिया। प्रो. शर्मा ने कहा कि स्वतंत्र भारत में ‘जेन-जी’ यानी नई पीढ़ी की ताकत को सबसे पहले लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पहचाना था और उसी युवा शक्ति को लोकतंत्र की मजबूती के लिए संगठित किया। अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यमंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि जेपी का स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत दोनों में योगदान अतुलनीय रहा है। आज जरूरत है कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। प्रतिष्ठान के अध्यक्ष आर.पी. शर्मा ने स्वागत भाषण में 50 वर्ष पूर्व आपातकाल की परिस्थितियों और जेपी के संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जेपी ने हमेशा युवाओं को आंदोलन की धुरी बनाया। उन्होंने भिलाई में जेपी प्रतिमा को बचाने के अपने संघर्ष की स्मृति साझा करते हुए कहा कि “जेपी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं।” कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता के रूप में साहित्यकार प्रो. सुधीर शर्मा ने कहा कि 1977 की क्रांति सत्ता परिवर्तन की क्रांति बनकर रह गई, क्योंकि राजनीतिक चेतना का विस्तार सीमित रहा। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी युवाओं में राजनीतिक विवेक जागृत करने की आवश्यकता है। जनता पार्टी के युवा नेता रहे अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि लोहिया और जेपी के वैचारिक उत्तराधिकार को उस समय राजनीतिक आधार नहीं मिल सका, लेकिन उनकी क्रांति ने लोकतंत्र को नई दिशा दी। मीसा बंदी डॉ. राम पाटणकर ने कहा कि 1975 का आंदोलन ही सच्चे अर्थों में वैचारिक आजादी का प्रतीक था, जिसके पुरोधा जयप्रकाश नारायण थे। कार्यक्रम के दौरान डॉ. राम पाटणकर का सम्मान किया गया। आयोजन में त्रिलोक मिश्रा, अधिवक्ता गुलाब सिंह पटेल, एडवोकेट अजहर अली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) छत्तीसगढ़ के महासचिव नंदकिशोर साहू ने किया।

Deepak

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