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दुर्ग में QR कोड से सशक्त हुए ग्रामीण — मनरेगा में बढ़ी पारदर्शिता

अनिता मिश्रा। विशेष संवादाता

दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में आज दुर्ग जिले की सभी ग्राम पंचायतों में “रोजगार दिवस” मनाया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को डिजिटल अधिकारों से सशक्त बनाना और योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को ग्राम पंचायत भवनों में लगाए गए QR कोड की उपयोगिता और कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। यह पहल छत्तीसगढ़ सरकार के डिजिटल इंडिया और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। लाइव डेमो से ग्रामीणों को मिला नया अनुभवजिला प्रशासन की टीम ने लाइव डेमो के माध्यम से ग्रामीणों को दिखाया कि स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन कर वे अपनी पंचायत में चल रहे मनरेगा कार्यों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।ग्रामीण अब 2021 से 2025 तक के कार्यों का डेटा, कार्य की स्थिति (पूर्ण या प्रगतिरत), स्वीकृत बजट और व्यय विवरण आसानी से देख सकते हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि यह QR कोड तकनीक ग्रामीणों के लिए एक “क्रांतिकारी उपकरण” साबित होगी। इससे उन्हें कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ मिलेंगी —पारदर्शिता: स्वीकृत परियोजनाओं, बजट और प्रगति की वास्तविक समय पर जानकारी। रोजगार जानकारी: जॉब कार्ड धारक अपने कार्य दिवस, मजदूरी भुगतान (₹261/दिन) और बेरोजगारी भत्ते की स्थिति देख सकेंगे। डिजिटल समावेशन: जानकारी हिंदी और छत्तीसगढ़ी दोनों में उपलब्ध होगी, जिससे महिलाएँ और युवा भी आसानी से समझ सकेंगे। शिकायत निवारण: QR कोड से सीधे हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल तक पहुँच संभव होगी। ग्रामीणों में उत्साह, प्रशासन के प्रति विश्वास में वृद्धि रोजगार दिवस के इस आयोजन ने ग्रामीणों में नई जागरूकता और उत्साह का संचार किया है। यह पहल मनरेगा योजनाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास मानी जा रही है।जिला प्रशासन दुर्ग ने ग्रामीणों से अपील की कि वे QR कोड का अधिकतम उपयोग करें और अपनी पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाएं। यह QR कोड तकनीक ग्रामीणों को सशक्त बनाने और शासन की योजनाओं को सीधे लोगों तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है।”

Deepak

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