अन्न” से सशक्त हुईं महिलाएँ — दुर्ग में शुरू हुई मोटे अनाज की मोबाइल फूड वैन
दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग।जिला पंचायत परिसर दुर्ग में आज सत्यम् महिला स्व-सहायता समूह द्वारा मोटे अनाज (मिलेट्स) से बने स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजनों की मोबाइल होटल (फूड वैन) का शुभारंभ किया गया। इस नवाचारपूर्ण पहल का उद्घाटन जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में किया गया। दुबे ने बताया कि मोटे अनाज, जिन्हें “श्री अन्न” के नाम से भी जाना जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर, ग्लूटन-फ्री और औषधीय गुणों से युक्त होते हैं। यह पहल भारत सरकार द्वारा घोषित “मोटे अनाज वर्ष (International Year of Millets)” के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह फूड वैन दुर्ग जिले की पहली महिला उद्यमी श्रीमती भारती टंडन द्वारा संचालित की जा रही है, जो ग्राम पंचायत बोडेगांव की निवासी हैं। वे वर्ष 2018 से बिहान योजना के अंतर्गत सत्यम् स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह की महिलाओं ने मुरकु पापड़, मसाला निर्माण और जैविक खाद जैसे कार्यों से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया था। अब श्रीमती टंडन मोटे अनाज से बने उत्पादों के माध्यम से प्रतिवर्ष 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं और “लखपति दीदी” योजना की प्रेरणादायक मिसाल बनी हैं। फूड वैन में मोटे अनाज से बने छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन जैसे मिर्ची भजिया, आलू गुड़ा, डोसा, मुटिया, अनरसा, खुर्मी, बरा के साथ रागी-बाजरा लड्डू, सलोनी, टेढ़री, कोदो की खिचड़ी, इडली और पकोड़ा जैसे पौष्टिक पकवान परोसे जा रहे हैं। इस पहल में सीमा बाई, नंदकुमारी, शेष बाई, अंजू, वर्षा, द्रौपदी, चित्ररेखा, ज्योति, निर्मला और प्रमिला बंजारे सहित कुल 11 महिलाएँ मिलकर व्यंजन निर्माण और विक्रय का कार्य कर रही हैं।bइस अवसर पर जनपद पंचायत दुर्ग की अध्यक्ष श्रीमती कुलेश्वरी देवांगन ने कहा —“मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक प्रेरणादायक पहल है। इससे न केवल जिले के पोषण स्तर में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भर और सशक्त बनेंगी।” यह पहल दुर्ग जिले में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय खाद्य परंपराओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत करती है।
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