ब्रेकिंग न्यूज़

अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में गरजे आचार्य डॉ. अजय आर्य,स्वामी दयानंद सनातन स्वाभिमान के शाश्वत प्रकाशस्तंभ — राष्ट्र सेवा व धर्म रक्षा का आह्वान

दीपक कुमार। विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ पर दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन में भिलाई (छत्तीसगढ़) के वैदिक चिंतक आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने ओजस्वी वक्तव्य से सभागार को प्रेरित किया। सनातन स्वाभिमान के पुरोधा – स्वामी दयानंद सरस्वती’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने केवल समाज सुधार नहीं किया, बल्कि गुलाम भारत को आत्मसम्मान और स्वतंत्र चिंतन की दिशा दी। डॉ. आर्य ने कहा कि स्वामी दयानंद ने 1873 में ही ‘स्वदेशी राज्य सर्वोपरि है’ का उद्घोष किया था। उन्होंने कहा, भारत विश्वगुरु रहा है और स्वामी दयानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्य पुरोहित सभा ने उन्हें स्कंधवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। आचार्य डॉ. अजय आर्य ने आज गीर गाय की गौशाला, यज्ञशाला और अनवरत वैदिक यज्ञ का अवलोकन किया तथा साधु-संतों से भेंट की। वे कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम और 11,111 कुंडी वैदिक महायज्ञ में भाग लेंगे। महासम्मेलन में 40 देशों के प्रतिनिधि और एक हजार से अधिक विद्वान शामिल हैं। “दयानंद नगर” में प्रदर्शनी, यज्ञशाला और सांस्कृतिक मंच आकर्षण का केंद्र बने हैं। पूरा परिसर वैदिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति के उद्घोष से गूंज उठा है।

Deepak

Related Articles

Back to top button