शंकर जी ही हनुमान के रूप में रुद्रावतार, श्रीराम से उनका संबंध आत्मा–परमात्मा जैसा- पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
दीपक कुमार ब्यूरो चीफ दुर्ग। न्यूज़ 20 भारत

भिलाई। जयंती स्टेडियम में आयोजित दिव्य हनुमंत कथा के चौथे दिन कथा परिसर भक्ति, श्रद्धा और आस्था से सराबोर नजर आया। दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु जमीन पर बैठकर, तो कई पेड़ों पर चढ़कर कथा श्रवण करते दिखाई दिए। कथा वाचन करते हुए अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि यदि सनातन धर्म को सुरक्षित रखना है और हिंदुओं को एकजुट रखना है,
तो जात-पात से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद को अपना मूल मंत्र बनाना होगा। तभी भारत अपने सांस्कृतिक स्वरूप में आगे बढ़ सकेगा। हनुमान चालीसा की चौपाइयों — “शंकर सुवन केसरी नंदन”, “तेज प्रताप महा जग वंदन”, “विद्या गुणी अति चातुर” — का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ही रुद्रावतार के रूप में हनुमान जी हैं, जिन्होंने माता अंजनी और वानरराज केसरी के तप के फलस्वरूप वानर कुल में जन्म लिया। उन्होंने कहा कि अतुलित बल होने के बावजूद अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के प्रति पूर्ण विनम्रता, बाल्यावस्था में सूर्य को निगल लेना, सौ योजन समुद्र लांघकर अहंकारी रावण की स्वर्ण लंका को जलाना—ये सभी अद्भुत गुण हनुमान जी को अद्वितीय बनाते हैं। स्वयं प्रभु श्रीराम द्वारा जिनका गुणगान किया गया, फिर भी वे सदा भक्त भाव में रहे—यह भक्त और भगवान के अटूट संबंध का सर्वोत्तम उदाहरण है। हनुमंत कथा के चौथे दिन रविवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, सांसद संतोष पाण्डेय, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय, कथा संयोजक राकेश पाण्डेय, वरिष्ठ नेता नंद कुमार साय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णेंद्रु सक्सेना, बिसरा राम यादव, सांसद चंदूलाल साहू, आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा, दीपक महस्के सहित अनेक जनप्रतिनिधि व गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री केवल एक कथावाचक नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर धर्मगुरुओं और संत-महात्माओं पर अनर्गल आरोप लगाते हैं, राम को काल्पनिक और वेद-पुराणों को मिथ्या बताने का दुस्साहस करते हैं। ऐसी अशिष्ट भाषा और विचारधारा को जनता समय आने पर स्वयं जवाब देगी। प्रदेश सरकार समाज को दिशा देने वाले धार्मिक आयोजनों और संत-महात्माओं के साथ सदैव खड़ी रहेगी। उल्लेखनीय है कि दिव्य हनुमंत कथा का समापन सोमवार को दोपहर 12 बजे से किया जाएगा।
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