IMF की रिपोर्ट कांग्रेस और विपक्ष के दावों पर करारा तमाचा : विजय साहू
देश की विकास दर का अनुमान बढ़कर 7 प्रतिशत, राहुल गांधी और विपक्ष को तथ्यों के आधार पर बात करने की नसीहत

अनिता मिश्रा/दीपक कुमार। भिलाई नगर।भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के पूर्व सदस्य विजय साहू ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक विश्वास का सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह रिपोर्ट कांग्रेस और विपक्ष द्वारा देश की आर्थिक स्थिति को लेकर किए जा रहे नकारात्मक दावों पर करारा तमाचा है। विजय साहू ने कहा कि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दी है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विकास दर का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास संभावनाओं को लेकर प्रतिष्ठित आर्थिक संस्थाओं के सकारात्मक अनुमान देश के लिए उत्साहजनक हैं। मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियां और आर्थिक सुधार भारत की विकास यात्रा को गति दे रहे हैं।कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधते हुए साहू ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के कुछ नेता लगातार देश की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की विकास दर के अनुमान बढ़ा रही हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब शायद कांग्रेस की अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार से नहीं, बल्कि आईएमएफ से सवाल किया जाएगा कि उसे भारत की तरक्की दिखाई कैसे दे रही है।साहू ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का सरकार से सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन सवाल तथ्यों और ठोस आंकड़ों पर आधारित होने चाहिए। केवल राजनीतिक विरोध के लिए देश की आर्थिक उपलब्धियों को नकारना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आर्थिक सुधारों, अधोसंरचना विकास, निवेश और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को लेकर काम कर रही है। आईएमएफ का संशोधित अनुमान भारत की आर्थिक संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ रोजगार, महंगाई और आम नागरिकों की आय में सुधार जैसे विषयों पर भी निरंतर प्रयास जरूरी हैं। विपक्ष को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय देशहित में तथ्यपूर्ण और रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए।
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