संस्कृत को पहली कक्षा से अनिवार्य किया जाए, संस्कृत विद्यालयों को मिले आर्थिक सहायता : महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास
अनिता मिश्रा/दीपक कुमार। विशेष संवादाता

भिलाई। सुपेला आकाश गंगा स्थित इंडियन कॉफी हाउस में महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास ने प्रेसवार्ता लेकर छत्तीसगढ़ में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की सांस्कृतिक पहचान और आत्मा है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराणों सहित ज्ञान-विज्ञान एवं साहित्य की अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं संस्कृत भाषा में हुई हैं। भारतीय संस्कृति और प्राचीन जीवन मूल्यों को समझने में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है। महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास ने कहा कि संस्कृत को केवल धार्मिक और शैक्षणिक भाषा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे आम जनमानस की भाषा बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। संस्कृत भाषा को सरल बनाकर इसके बोलचाल में अधिकाधिक उपयोग को प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने आगामी जनगणना में लोगों को अपनी भाषा के रूप में संस्कृत का उल्लेख करने के लिए भी प्रेरित करने की बात कही।उन्होंने छत्तीसगढ़ में संस्कृत शिक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव रखे। इनमें पहली कक्षा से संस्कृत विषय अनिवार्य करने, पूर्व माध्यमिक कक्षाओं में संस्कृत शिक्षकों की स्वतंत्र भर्ती करने तथा राज्य के महाविद्यालयों में संस्कृत विषय शुरू करने की मांग प्रमुख रही।उन्होंने कहा कि गैर-अनुदान प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को सम्मानजनक आर्थिक सहयोग दिया जाना चाहिए। संस्कृत पाठशालाओं को उनके अनुकूल वातावरण के अनुसार गुरुकुल के रूप में विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामंडलम की अनुदान राशि में वृद्धि कर संस्कृत विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। महामंडलेश्वर ने संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, संस्कृत अध्यापकों को नियमित प्रशिक्षण देने और सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयोजनों में संस्कृत की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए संस्कृत विद्यालयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए तथा संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य के विद्वानों से मार्गदर्शन लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में संस्कृत को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए सरकार को पर्याप्त आर्थिक सहयोग और ठोस पहल करनी होगी, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, परंपरा और प्राचीन ज्ञान से जुड़ सके। इस मौके पर ओमकार दास जी महाराज राकेश रामलोचन तिवारी,जीवेश उपाध्याय युवराज शर्मा आदि मौजूद रहे।
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