धनुष टूटते ही जनकपुरी में छाई खुशियां
सीता स्वयंवर मंचन में धनुष टूटते ही गूंजे श्रीराम के जयकारे

कासगंज/अमांपुर : कस्बा के बारहद्रारी पर चल रही 11 दिवसीय संगीतमयी आदर्श श्रीरामलीला मंचन महोत्सव के तृतीय दिवस रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने भगवान श्रीराम लक्ष्मण जी के स्वरूप का पूजन कर आरती उतारी। आदर्श श्रीराम लीला महोत्सव में अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ लीला, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीला का मंचन किया गया। रामलीला का मंचन गणेश वंदना के साथ शुरू हुआ। सीता स्वयंवर के लिए राजा जनक ने धनुष यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें रावण व श्रीराम, लक्ष्मण धनुष यज्ञ देखने गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचते हैं। जहां फुलवारी में राम को सीता देखती हैं फिर उनमे प्रभु के साथ विवाह करने की इच्छा जागृति होती है। जैसे ही प्रभु श्रीराम के द्वारा धनुष तोड़ते ही आकाश से देवताओं के द्वारा फूलों की वर्षा होने लगी। लोगों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद की लीला का सजीव मंचन किया गया। जिसे देख दर्शक भाव-विभोर हो गए। इस दौरान श्रद्धालु दर्शक जयश्री राम का उद्घघोष करते रहे। इससे पूरा पांडाल गुंजायमान रहा। गुरू विश्वामित्र राम व लक्ष्मण को लेकर जनकपुर के लिए निकलते हैं। रास्ते मे उन्हें एक शिला दिखाई पड़ती है। तब वह शिला के बारे मुनि ने जानकारी हासिल करते हैं। तब उन्हे पता चलता है कि गौतम ऋषि की पत्नी है। जो शाप के कारण शिला बन गई। चरण से स्पर्श करने भगवान राम अहिल्या का उद्धार करते है। इसके बाद जनकपुर पहुंचकर विश्राम करते हैं। सुबह राम व लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र की पूजा करने के लिए पुष्प लेने फुलवारी में जाते हैं। यह वाटिका महाराज जनक की दुलारी बेटी सीता की थी। सीता अपनी सखियों के साथ वहां पर आती हैं। एक सखी की नजर राम-लक्ष्मण पर पड़ती है। वह राम-लक्ष्मण के बारे में सीता जी को बताती है। इस दौरान फुलवारी में सीता जी ने भगवान श्रीराम को देखा तो वह मां पार्वती से राम को पति के रूप में की कामना करती है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कोतवाली प्रभारी यतीन्द्र प्रताप सिंह, एसआई शांतिस्वरूप सिंह, एसआई ब्रहापाल सिंह, कस्टेबल शंशाक दुबे, शैलेन्द्र सिंह, अवधेश कुमार, अनुरूद्र कुमार, सतीश कुमार, हरीश कुमार, सजीव कुमार तैनात आदि रहे।
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