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लोकतंत्र के पुजारी जयप्रकाश नारायण की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित,आचार्य डॉ. अजय आर्य बोले — “जेपी केवल व्यक्ति नहीं, एक विचार थे

अनिता मिश्रा। विशेष संवादाता

भिलाई। भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 123वीं जयंती पर लोकतंत्र सेनानी संघ एवं लोकतंत्र प्रहरी संगठन के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सेक्टर-2 और सेक्टर-6 के मध्य स्थित जयप्रकाश नारायण प्रतिमा स्थल पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों एवं सदस्यों ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर पुष्पमालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर “जयप्रकाश नारायण अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। सभा का संचालन मनोज ठाकरे ने किया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रभारी योगेंद्र सिंह ने जेपी के जीवन, संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में आर्य समाज के विद्वान आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा, “जयप्रकाश नारायण केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं — वह प्रखर जनजागरण की लौ, जिसने देश को अधिनायकवाद के अंधकार से निकालकर लोकतंत्र की ज्योति दी।” उन्होंने कहा कि ‘संपूर्ण क्रांति’ राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और नैतिक पुनर्जागरण का संदेश था। डॉ. आर्य ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जेपी के आदर्शों को आत्मसात करें, अपने भीतर के क्रांतिकारी विचारों को सकारात्मक दिशा दें और समाज के उत्थान में योगदान करें। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रभुनाथ मिश्रा ने कहा कि 1977 का वर्ष भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ था, जिसने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की — और इस परिवर्तन के केंद्र में लोकनायक जयप्रकाश नारायण थे। कार्यक्रम में विशाल राजहंस, रामदेव सिंह, अशोक पांडे, पप्पू खान, रजनीकांत पांडे, प्रशांत क्षीरसागर, भाजपा महामंत्री विजेंद्र सिंह, सुजीत सिंह, डॉ. गणेश पांडे, दिनेश मिश्रा, रामलखन मिश्रा, एडवोकेट गुलाब पटेल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी उपस्थितजनों ने जयप्रकाश नारायण के आदर्शों पर चलने और लोकतंत्र की रक्षा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

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