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विकसित ग्राम पंचायत योजना को लेकर संभाग स्तरीय प्रशिक्षण संपन्न अधिकारियों को सहभागी एवं साक्ष्य-आधारित विकास योजना निर्माण की दी गई जानकारी

अनिता मिश्रा/ दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग। विकसित भारत जी-राम-जी अंतर्गत डीपीआरसी अंजोरा, दुर्ग में 15 एवं 16 जून को संभाग स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विकसित भारत के संकल्पों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता का विकास करना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना था।प्रशिक्षण में दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सहायक परियोजना अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया।दूसरे दिन प्रतिभागियों को विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीवाई) मॉड्यूल का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित, सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक, सहभागी और साक्ष्य-आधारित विकास योजनाएं तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (पीआरए), संसाधन मानचित्रण, अंतराल विश्लेषण, विकासोन्मुख अभिसरण रणनीतियों तथा जीआईएस जैसी डिजिटल तकनीकों के उपयोग से अवगत कराया गया। साथ ही ग्राम पंचायतों की आवश्यकताओं की पहचान, परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने, वार्षिक एवं दीर्घकालिक विकास योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के तरीके भी बताए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि ग्राम सभा, वार्ड सभा, स्वयं सहायता समूहों एवं अन्य स्थानीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों एवं योजनाओं के संसाधनों के अभिसरण तथा संतृप्ति दृष्टिकोण पर भी जोर दिया गया, जिससे प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सके। प्रशिक्षण के समापन पर बताया गया कि विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र एवं सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा पंचायतें अधिक सक्षम, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बन सकेंगी।

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