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सेक्टर-9 अस्पताल में जन्मे डॉ. उदय कुमार बने हेड ऑफ मेडिकल, अब जेएलएन अस्पताल को देंगे नई पहचान

चिकित्सा अधिकारी से मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं हेड ऑफ मेडिकल तक का प्रेरणादायी सफर, बर्न विभाग को दिलाई राष्ट्रीय पहचान

    1. अनिता मिश्रा/दीपक कुमार ब्यूरो चीफ दुर्ग/भिलाई। सेक्टर-9 स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएन अस्पताल) में जन्मे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उदय कुमार को अस्पताल का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) एवं हेड ऑफ मेडिकल बनाया गया है। चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. उदय कुमार ने अपनी कार्यकुशलता, समर्पण और नेतृत्व क्षमता के बल पर यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल की है। अब उनके नेतृत्व में सेक्टर-9 अस्पताल के चिकित्सा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। डॉ. उदय कुमार के पिता भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 11वीं कक्षा तक की पढ़ाई भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-6 स्थित विद्यालयों में हुई। इसके बाद उन्होंने कल्याण कॉलेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई की और पीएमटी में चयनित होकर रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस एवं एमएस की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1994 में उन्होंने सेक्टर-9 अस्पताल के बर्न विभाग में चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। वर्ष 2013 में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में भिलाई का बर्न विभाग मध्य भारत के सर्वश्रेष्ठ बर्न उपचार केंद्रों में शामिल हुआ। डॉ. उदय कुमार की पहल पर भिलाई इस्पात संयंत्र के बर्न विभाग में मध्य भारत का पहला तथा सेल का पहला स्किन बैंक स्थापित किया गया। इस स्किन बैंक के माध्यम से अब तक सैकड़ों गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जान बचाई जा चुकी है, जिससे अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ डॉ. उदय कुमार ने अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने बॉलीवुड की हिंदी फिल्म ‘रमाई’ में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर दर्शकों की सराहना प्राप्त की। अपनी सरलता, सहज व्यवहार और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के कारण डॉ. उदय कुमार आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में उनकी विशेषज्ञता के चलते मरीज और उनके परिजन उनकी कुशलता के लिए मंदिरों में कथा-यज्ञ कराते हैं तथा दरगाहों पर चादर भी चढ़ाते हैं। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ वे पिछले 32 वर्षों से लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित कर समाजसेवा कर रहे हैं। उन्होंने झिरिया पारा और रूआबांदा बस्ती को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में विकास का एक सफल मॉडल तैयार किया, जिसकी पूरे छत्तीसगढ़ में सराहना की जाती है। चिकित्सा अधिकारी से मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अब हेड ऑफ मेडिकल तक का उनका सफर युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अस्पताल परिवार और शहरवासियों को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में सेक्टर-9 अस्पताल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और उत्कृष्ट चिकित्सा प्रबंधन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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