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जिला पंचायत में गौधाम योजना जिला स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न गौधामों के प्रभावी संचालन, गोवंश संरक्षण और आत्मनिर्भरता पर दिया गया जोर

अनिता मिश्रा/ दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग। जिला पंचायत सभा कक्ष में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बजरंग कुमार दुबे की अध्यक्षता में गौधाम योजना जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग की जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, पंचायत सदस्य श्रीमती श्रद्धा साहू (उमरपोटी), पशुधन विकास विभाग के अधिकारी, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में गौधाम योजना के अंतर्गत संचालित गौधामों के प्रभावी संचालन, रखरखाव एवं प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। योजना के तहत पंजीकृत गौधामों के अध्यक्ष एवं सचिव भी बैठक में शामिल हुए। ग्राम पंचायत उमरपोटी, नारघा, चंदखुरी एवं बासीन सहित विभिन्न गौधाम समितियों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं से समिति को अवगत कराया। बैठक के दौरान गोवंश संरक्षण एवं नस्ल संवर्धन, मवेशी शेड, चारा, स्वच्छ पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने संबंधित अधिकारियों को सभी गौधामों का नियमित निरीक्षण कर समस्याओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौधामों के सुचारू संचालन एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। बैठक में गौधाम योजना के दिशा-निर्देशों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि गौधामों में पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, छायादार व्यवस्था एवं आवश्यक पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गौधाम परिसरों की नियमित साफ-सफाई, पशुओं का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण तथा आवश्यक मरम्मत कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। गौधाम समितियों को अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण एवं वित्तीय प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ करने पर भी जोर दिया गया। उल्लेखनीय है कि गौधाम योजना के अंतर्गत जिले में बेसहारा, घुमंतु एवं आवारा गोवंश के संरक्षण के लिए चार गौधाम पंजीकृत हैं। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गोवंश रखने की क्षमता विकसित की गई है, जहां पशु शेड, सुरक्षित बाड़ा, स्वच्छ पेयजल, विद्युत एवं चारागाह जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय देने, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, पशुधन संरक्षण को बढ़ावा देने तथा चरवाहों एवं गौसेवकों को रोजगार एवं मानदेय उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है।

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