दुर्ग में ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को मिली नई गति, पाटन-धमधा के 15 गांवों में वर्षा जल संरक्षण की अभिनव पहल कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में इंजेक्शन वेल, सोख्ता गड्ढों और जन जागरूकता अभियान से भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा
अनिता मिश्रा/ दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग। जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और जल सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर दुर्ग जिला प्रशासन ने पाटन एवं धमधा विकासखंड के चयनित गांवों में “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत वर्षा जल संरक्षण एवं भूजल रिचार्ज की अभिनव पहल शुरू की है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में वाटरएड इंडिया के सहयोग से संचालित इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना और चयनित गांवों को चरणबद्ध तरीके से जल-सुरक्षित ग्राम (वाटर सिक्योर विलेज) के रूप में विकसित करना है। अभियान के तहत मानसून से पहले सभी प्रमुख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया गया है, ताकि इस वर्ष होने वाली वर्षा के जल का अधिकतम संचयन एवं भूजल पुनर्भरण सुनिश्चित किया जा सके। चयनित गांवों में 6 इंजेक्शन वेल बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 9,324 वर्गमीटर जलग्रहण क्षेत्र का वर्षा जल सीधे भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इससे आसपास के 47 पेयजल स्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी। ग्राम घुघुवा, पतोरा, चुन्कट्टा, सेलूद, गोंडपेंड्री और फेकारी में स्थापित इंजेक्शन वेलों के माध्यम से लाखों लीटर वर्षा जल का भूजल में पुनर्भरण होगा, जिससे भविष्य में पेयजल उपलब्धता और मजबूत होगी। घरेलू एवं सामुदायिक अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ग्राम सेलूद एवं गोंडपेंड्री में लगभग 75 घरेलू सोख्ता संरचनाओं का निर्माण किया गया है। वहीं चयनित गांवों में 5 सामुदायिक सोख्ता गड्ढे हैंडपंपों के समीप बनाए गए हैं, जिससे व्यर्थ बहने वाले पानी का उपयोग भूजल पुनर्भरण में किया जा रहा है। इससे जलभराव और गंदगी में कमी आने के साथ स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से सभी ग्राम पंचायतों में नियमित सामुदायिक बैठकें, जनजागरूकता अभियान और जल संरक्षण संबंधी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। “रिड्यूस वाटर वेस्टेज” अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को जल के विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह अभियान पाटन विकासखंड की 7 तथा धमधा विकासखंड की 8 ग्राम पंचायतों, यानी कुल 15 ग्राम पंचायतों में संचालित किया जा रहा है। आगामी चरण में 10 नई जल संरक्षण संरचनाओं, 150 घरेलू सोख्ता गड्ढों और 25 सामुदायिक सोख्ता गड्ढों के निर्माण की योजना है। जिला प्रशासन और वाटरएड इंडिया ने समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ इन गांवों को जल सुरक्षा के क्षेत्र में मॉडल गांव के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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