दुर्ग जिले में स्वच्छता और आजीविका का अनूठा संगम, ई-रिक्शा में जुड़ रहे लाल-काले डब्बे
प्लास्टिक कचरे के पृथक्करण और रीसाइक्लिंग के साथ स्वच्छाग्रही महिलाओं के मानदेय भुगतान पर विशेष जोर

अनिता मिश्रा/दीपक कुमार। दुर्ग। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिला पंचायत दुर्ग के मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिला कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे के नेतृत्व में संचालित अभियान से ग्राम पंचायतों के साथ स्वच्छाग्रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को भी लाभ मिल रहा है। जिले के दुर्ग, धमधा एवं पाटन विकासखंडों में प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए 47 रूट चार्ट तैयार किए गए हैं। इसके तहत गांवों में बने सेग्रीगेशन शेड से ई-रिक्शा के माध्यम से प्रतिदिन कचरा एकत्र किया जा रहा है। कचरे के प्रारंभिक पृथक्करण को प्रभावी बनाने के लिए अब ई-रिक्शा में लाल एवं काले रंग के डब्बे लगाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से गीले, सूखे और विशेषकर प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। ग्रामीणों को भी कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।अभियान से स्वच्छाग्रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार एवं आय का अवसर भी मिल रहा है। महिलाएं घरों और सेग्रीगेशन शेड से प्लास्टिक अपशिष्ट को अलग कर बोरियों में भरती हैं तथा उसका वजन दर्ज करती हैं। इसके बाद प्लास्टिक को विकासखंड स्तर पर स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU) तक पहुंचाया जाता है, जहां इसे उचित बाजार मूल्य पर विक्रय किया जाता है। इससे समूहों की आय में वृद्धि हो रही है। अभियान के दौरान स्वच्छाग्रही महिलाओं का अगस्त माह तक का मानदेय समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। 01 से 15 सितंबर तक चल रहे अभियान के तहत लगातार प्लास्टिक संग्रहण एवं पृथक्करण किया जा रहा है। 15 सितंबर को एकत्रित प्लास्टिक को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग के लिए विक्रय किया जाएगा। प्रशासन की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
Subscribe to my channel


