डॉ. उदय कुमार के विदाई समारोह में बुजुर्ग महिला का भावुक सम्मान, कृतज्ञता का अनूठा दृश्य बना चर्चा का विषय
एक बुजुर्ग महिला के हाथों से हार पहनने के लिए डॉ. उदय कुमार ने झुकाया सिर, भावुक हुए उपस्थित लोग

अनिता मिश्रा/दीपक कुमार। भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उदय कुमार के सेवानिवृत्ति समारोह के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। यह दृश्य डॉ. उदय कुमार के व्यक्तित्व, उनके व्यवहार और आम लोगों के दिलों में उनके प्रति सम्मान एवं आत्मीयता को दर्शाता है। समारोह के दौरान जब डॉ. उदय कुमार बग्घी में सवार होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे, तभी एक गरीब बुजुर्ग महिला हाथों में हार लेकर उनके पास पहुंचने का प्रयास करने लगी। उम्र के कारण उनके हाथ कांप रहे थे और वे ठीक से हाथ भी नहीं उठा पा रही थीं। भीड़ में महिला को देखकर डॉ. उदय कुमार ने तत्काल बग्घी रुकवाई और लोगों को इशारा कर उन्हें पास बुलाया। जब बुजुर्ग महिला हार पहनाने के लिए हाथ ऊपर नहीं उठा सकीं, तब डॉ. उदय कुमार ने स्वयं अपना सिर झुका दिया। इसके बावजूद महिला के हाथ उनके सिर तक नहीं पहुंच पाए, तो उन्होंने बड़े सम्मान और आत्मीयता के साथ महिला के हाथों को थामकर हार पहनाने में मदद की। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि महिला और डॉ. उदय कुमार दोनों की आंखें नम हो गईं। वहां उपस्थित लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। कुछ पल के लिए मानो समय ठहर गया हो। एक ओर भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ चिकित्सक की गरिमामय विदाई थी, तो दूसरी ओर एक साधारण बुजुर्ग महिला की ओर से वर्षों के स्नेह और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति। इस भावुक प्रसंग का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ से प्रथम बोर्ड मेंबर एवं ललित कला अकादमी, नई दिल्ली, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य डॉ. अंकुश देवांगन ने अपनी लघुकथा ‘कृतज्ञता’ के माध्यम से डॉ. उदय कुमार के व्यक्तित्व को शब्दों में पिरोया है। उन्होंने कहा कि डॉ. उदय कुमार की असली पहचान केवल उनका पद या चिकित्सा क्षेत्र में योगदान नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में उनके लिए मौजूद सम्मान और अपनापन है। बुजुर्ग महिला के प्रति उनका विनम्र व्यवहार यह बताता है कि सच्ची महानता पद में नहीं, बल्कि इंसानियत और दूसरों को दिए जाने वाले सम्मान में होती है।
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