
आज ग्राम मुरमुंदा में 25 जून 1975 को देश पर थोपा गया आपातकाल जिसे भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन माना जाता है।की स्मृति में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं व आम जनता को यह स्मरण कराना था कि कैसे कांग्रेस सरकार द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की खुलेआम हत्या की गई थी।कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक आदरणीय राजमहंत डोमन लाल कोर्सेवाड़ा जी उपस्थित रहे। विधायक जी ने कहा कि आपातकाल की वह रात न सिर्फ संविधान पर हमला था, बल्कि आम जनता की आवाज को कुचलने का घृणित प्रयास था। हमें आने वाली पीढ़ियों को यह बताना होगा कि कैसे सत्ता के मोह में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने देश को जेलखाना बना दिया था।इस अवसर पर दुर्ग जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे, मुरमुंदा मंडल अध्यक्ष खुमन साहू, विधायक प्रतिनिधि जिला पंचायत प्रेम सागर चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त IFS अधिकारी के.के. खेलवार, तथा क्षेत्र के जनपद सदस्यगण, वरिष्ठ कार्यकर्ता, महिला मोर्चा एवं युवा मोर्चा के पदाधिकारीगण भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान विधायक जी ने 1975 की आपातकालीन परिस्थितियों, सेंसरशिप, विरोधियों की गिरफ्तारियों, प्रेस की आज़ादी पर रोक, और न्यायपालिका पर दबाव जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। जनभागीदारी उल्लेखनीय रही और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं एवं बुद्धिजीवियों ने उपस्थिति दर्ज कराई।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया।
Subscribe to my channel


