एक ओंकार सतनाम का उपदेश – गुरु नानक जयंती पर आर्य समाज का प्रेरक संदेश
दीपक कुमार। विशेष संवादाता

भिलाई। गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती पर आर्य समाज ने गुरु नानक के प्रति कृतज्ञता व्यक्ति की। आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि गुरु नानक का जीवन सत्य, श्रम और करुणा का संगम है। गुरु नानक ने एक ईश्वर की उपासना करना सिखाया और मानवता की प्रेरणा दी। उन्होंने सिखाया कि सच्ची भक्ति पूजा में नहीं, बल्कि कर्म और सेवा में है। आचार्य ने गुरु नानक की प्रेरक कथा सुनाई—एक बार उन्होंने दो रोटियाँ मांगीं, एक ईमानदारी की और एक बेईमानी की। ईमानदारी की रोटी से सुगंध आई, जबकि बेईमानी की रोटी से रक्त टपका। उन्होंने कहा—“दूसरों का हक़ मारकर कमाई गई रोटी पाप है।” युवाओं से आचार्य ने आह्वान किया कि वे गुरु नानक की शिक्षाओं को जीवन में उतारें। उन्होंने कहा—“सच्ची सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि परिश्रम और सत्य से मिलती है।” सभा गुरु नानक के आदर्शों से प्रेरणा लेकर भावनात्मक रूप से गूंज उठी।
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