छत्तीसगढ़ी व्यंजनों और प्राकृतिक उर्वरकों का लाइव प्रदर्शन बना आयोजन का आकर्षण-सांसद विजय बघेल
दीपक कुमार। विशेष संवाददाता

भिलाई /धमधा । सांस्कृतिक कॉलेज, ग्राम खपरी में “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वार्ता का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना के साथ किया गया। स्वागत सम्मान के रूप में अतिथियों को शाल एवं श्रीफल भेंट किए गए। आयोजन में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया, जिसका स्वाद दुर्ग सांसद विजय बघेल ने स्वयं चखकर उसकी प्रशंसा की। उन्होंने आयोजकों को इस पहल के लिए बधाई दी। कार्यक्रम में देव संस्कृति प्रतिनिधि प्रशांत श्रीवास्तव, दुर्ग विश्वविद्यालय के डॉ. हेमचंद यादव, जूलॉजी विभाग की सुश्री सारिका शर्मा, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली की डॉ. ज्योति शर्मा, निदेशक ज्योति दुबे और हेड ममता दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अपने विचार रखते हुए डॉ. ज्योति शर्मा ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु निर्माण नए भारत की मजबूत नींव है।सांसद विजय बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत संतों, साधुओं और सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक धरोहर वाला देश है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी शिक्षा थोपे जाने से भारतीय गुरुकुल परंपरा को गहरी क्षति पहुँची, परंतु आज नए भारत में भारतीय शिक्षा पद्धति की पुनर्स्थापना के लिए बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं तथा नया भारतीय पाठ्यक्रम भारतीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। कार्यक्रम में प्राकृतिक उर्वरकों के निर्माण पर भी लाइव प्रदर्शन किया गया। चाय की पत्तियों से तैयार खाद, फंगस रोगों के प्राकृतिक उपचार तथा मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने वाले कम लागत वाले जैविक उपायों को रासायनिक विकल्पों की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी बताया गया।कार्यक्रम के अंत में निदेशक डॉ. ज्योति शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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