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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2026: ‘देने से बढ़ती है ताकत’ के संदेश के साथ मनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का वैश्विक पर्व

दीपक कुमार ब्यूरो चीफ दुर्ग। न्यूज़ 20 भारत

भिलाई। हर वर्ष 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने और समान अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को याद करने का अवसर होता है। यह दिन महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान को मान्यता देने के साथ-साथ लैंगिक समानता और सशक्तिकरण का संदेश देता है। मास्टर ऑफ सोशल वर्क उषा क्षीरसागर ने इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का संदेश “देने से बढ़ती है ताकत” समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और साझेदारी की भावना को मजबूत करने का आह्वान करता है। उन्होंने कहा कि हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए भी महिलाओं और लड़कियों के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस दिन देश-दुनिया में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता अभियान, संगोष्ठी, सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और समाज में समान अवसर सुनिश्चित करना है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से हुई थी, जब लगभग 15 हजार कामकाजी महिलाओं ने बेहतर वेतन, कम कार्य समय और मतदान के अधिकार की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली थी। इस आंदोलन ने उस समय समाज में महिलाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर किया और उनके अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। इसके बाद 28 फरवरी 1909 को अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर पहली बार महिला दिवस मनाया गया। वर्ष 1910 में कोपेनहेगन में आयोजित सोशलिस्ट इंटरनेशनल सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे व्यापक समर्थन मिला। महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने का विचार जर्मन समाजसेवी क्लारा जेटकिन ने प्रस्तुत किया था। उन्होंने कोपेनहेगन में आयोजित कामकाजी महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय बैठक में यह प्रस्ताव रखा, जिसका 17 देशों की करीब 100 महिलाओं ने समर्थन किया। इसके बाद 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। बाद में 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता दी और हर वर्ष इसे एक विशेष थीम के साथ मनाने की परंपरा शुरू की। उस समय पहली थीम “सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फॉर द फ्यूचर” रखी गई थी। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में महिलाओं के संघर्ष, उनकी उपलब्धियों और समाज में उनके बढ़ते योगदान का प्रतीक बन चुका है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि समानता, सम्मान और अवसर केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक बेहतर और संतुलित समाज की नींव हैं।

Deepak

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