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दुर्ग जिले में कचरा प्रबंधन पर सख्ती, सरपंचों-सचिवों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण जिला स्तर पर गठित विशेष समिति करेगी मॉनिटरिंग, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानकारी भी दी गई

अनिता मिश्रा/दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग। जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जनपद पंचायत दुर्ग, धमधा एवं पाटन के सरपंचों, सचिवों और जनप्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण में जिले की 300 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव शामिल हुए। कार्यशाला में कचरा पृथक्कीकरण, डोर-टू-डोर कलेक्शन, वैज्ञानिक अपशिष्ट निष्पादन, पुराने डंपिंग यार्डों के रेमेडिएशन और स्वच्छता जागरूकता अभियान पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों की निगरानी के लिए विशेष समिति गठित की गई है, जो सभी गतिविधियों की सख्त मॉनिटरिंग करेगी। प्रशिक्षण में ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में घरों से गीला, सूखा, सेनेटरी और स्पेशल केयर वेस्ट का पृथक्कीकरण अनिवार्य होगा तथा खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर रोक रहेगी। नागरिकों को सार्वजनिक स्थलों और जल स्रोतों में कचरा फेंकने से प्रतिबंधित किया गया है। कार्यक्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को लेकर पारित आदेशों की जानकारी भी दी गई। साथ ही संबंधित नियमों और न्यायालयीन आदेशों की प्रतियां जनप्रतिनिधियों को अध्ययन एवं पालन हेतु वितरित की गईं। इस अवसर पर जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय, धमधा के सीईओ किरण कुमार कौशिक एवं पाटन के सीईओ जागेन्द्र कुमार साहू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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