मोर गांव मोर पानी महाभियान से दुर्ग जिले में जल संरक्षण और रोजगार को नई गति 102 ग्राम पंचायतों में 112 नवा तरिया व तालाब गहरीकरण कार्य स्वीकृत, महिला समूहों को मिलेगा संचालन का जिम्मा
अनिता मिश्रा/ दीपक कुमार। विशेष संवादाता

दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित “मोर गांव मोर पानी” महाभियान के तहत दुर्ग जिले में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर नवा तरिया निर्माण एवं तालाब गहरीकरण कार्य किए जा रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत जिले की 102 ग्राम पंचायतों में 112 कार्यों को स्वीकृति दी गई है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशन में जनपद पंचायत धमधा, दुर्ग और पाटन क्षेत्र में संचालित इन कार्यों को 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से निर्माण कार्य तेजी से जारी हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। जिले में स्वीकृत कार्यों में धमधा की 40, दुर्ग की 49 और पाटन की 13 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन परियोजनाओं के तहत तालाब गहरीकरण, नवा तरिया निर्माण तथा जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न संरचनात्मक कार्य किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कार्यों का चयन ग्रामसभा की सहमति से किया गया है और बारिश से पहले इन्हें पूरा करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि अभियान के तहत निर्मित प्रत्येक तालाब में 10 हजार घनमीटर से अधिक जल भंडारण क्षमता विकसित होगी। इससे वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा, भू-जल स्तर में सुधार आएगा तथा कृषि और मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि निर्माण पूर्ण होने के बाद तालाबों का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा, जिससे महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिलेंगे। प्रत्येक तालाब में प्रतिवर्ष 13 से 15 क्विंटल तक मत्स्य उत्पादन की संभावना है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।उन्होंने कहा कि “मोर गांव मोर पानी” महाभियान जल संरक्षण, रोजगार सृजन, मत्स्य पालन और महिला सशक्तिकरण को एक साथ आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रही है।
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