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भिलाई: सट्टा खेलने, खिलाने वाले महादेव id एप्प के अपराधियों पर गंभीरता पूर्वक कार्यवाही हो

भिलाई: स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से सट्टा खिलाने वालों और सट्टा कि मोबाइल आईडी ऐप रखने वालों के संदर्भ में एक बयान जारी कर गंभीर कार्यवाही की मांग शासन प्रशासन से की है। अपने विचार रखते हुए सतीश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आज महादेव आईडी ऐप नाम से छत्तीसगढ़ का ही नहीं बल्कि देश का एक बहुत बड़ा सट्टा नेटवर्क चल रहा है।  आईपीएल के दो-तीन हजार करोड़ रुपए के सट्टे के खिला लिए जाने के बाद अचानक पुलिस में जागृति आई है। धड़ाधड़ गिरफ्तारियां करनी शुरू की। कई प्रकार के लोग पकड़े गए। रकम जब्ती का मामला विवादास्पद है। लेकिन सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार करने के बाद भी सभी पुलिस के चंगुल से बड़े आसानी से छूट गए। क्योंकि जिन धाराओं के तहत गिरफ्तारियां हुई वह राह चलते किसी पर भी पुलिस यूं ही लगा देती है। जैसे 151 ऐसी धारा है जिसमें कोई भी 24 घंटे के लिए गिरफ्तार हो सकते हैं। जो धारा 4(क) सट्टे/ जुएं के अपराध पर लगाई जाती है पता नहीं वह किस जमाने की है। उसमें कार्यवाही होती ही नहीं है। प्रश्न यह है कि सारे अपराधी छूट गए तो गिरफ्तारी का मतलब क्या हुआ? मुख्य अपराधी विदेशों में बैठकर महादेव का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। अपराध के मामले में महादेव का नाम? जब पटाखा फोड़ने के नाम पर लक्ष्मी बम मैं लक्ष्मी जी की फोटो से हिंदुओं की भावनाएं आहत हो जाती हैं तो सट्टा खिलाने के नाम पर महादेव का नाम कैसे किसी को आहत नहीं करता? तो धार्मिक भावनाओं को भड़काने का मामला क्यों नहीं बनाया जाताl दूसरा, यह सट्टा तो ऑनलाइन है। इसमें “आईडी” और “ऐप” शब्द जुड़े हुए हैं। तो फिर आईटी एक्ट के तहत ऑनलाइन गंभीर अपराधों के कानून के तहत अपराधियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जाती? इस ऐप में निश्चित रूप से सभी खेलने वालों की कोई सूची भी होगी। उस सूची को किसी भी सट्टेबाज के मोबाइल से प्राप्त किया जा सकता है। फिर हमारे शहर की पुलिस या हमारे जिले का पुलिस महकमा या हमारे छत्तीसगढ़ का पुलिस महकमा क्या इतना अनपढ़ मूर्ख और गवार है कि वह ऐसे सट्टेबाजों के नाम सूचीबद्ध करके सार्वजनिक नहीं कर सकता? तो कैसे माने कि इमानदारी से कार्यवाही हो रही हैं? भिलाई नगर के एसपी में अच्छा करने का एक जुनून दिखता है। जिला कलेक्टर भी ठीक-ठाक व्यक्ति हैं। लेकिन ऐसी कौन सी मजबूरियां हैं कि अपराध के मामले में जानबूझकर शातिर और आदतन अपराधियों के ऊपर अपराध की निहायत कमजोर धाराएं लगाई जाती हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री बयान देते हैं कि कठोर कार्यवाही हो।दूसरी तरफ सिर्फ दिखावे की कार्यवाही? अधिकारियों को अपने चरणदास बनाने की मुहिम इन नेताओं को कहीं का नहीं छोड़ेगी। यदि निष्पक्षता और ईमानदारी से कार्यवाही होने लगेंगे तो न जाने कितने शातिर और नामी-गिरामी नेताओं के नाम सामने उजागर हो जाएंगे। राजनीतिक हमाम में सभी नंगे हैं। ऐसे में अपराधी को उसकी राजनीतिक पहचान बताकर जानबूझकर के अपराध की गंभीरता को कम कर दिया जाता है। कोई भाजपाई शराब बेच रहा है तो कोई कांग्रेसी सट्टा खिला रहा है। कोई कांग्रेसी सत्ता के मद में सरेआम फ्रॉड करके लूट रहा है। ऐसी बातें कहते समय दल सामने आ जाता है और अपराध छोटा हो जाता है। अपराध को अपराध के नजर से देखना चाहिए। अन्यथा यह कांग्रेस और भाजपा के नाम पर अपराध की राजनीति का महिमामंडन ही होता रहेगा। यही अपराधी दलाल बनकर समाज से शोषण पूर्वक धन लेकर नेता बनेंगे और सामान्य नागरिक हमेशा की तरह छला जाता रहेगा।

 

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