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कासगंज: निष्प्रयोज्य हो गए कुएं अब बन रहे जानलेवा, जीर्णोद्धार की मांग की

संकट में कुओं का अस्तित्व, समाप्त हो रहे कुएं, पुराने जलश्रोत कुओं का अस्तित्व खतरे में

कासगंज: अमांपुर में पुराने जल श्रोत कुंए लगभग समाप्ति की ओर जा रहे है। जहां पेयजल सुविधा के लिए मुहल्लों में कुआं होता था। वही आज रख रखाव के अभाव में अधिकांश कुएं गिर चुके है या लोगो ने उसमें कूड़ा डालकर बंद कर दिया। जिससे कुओं का अस्तित्व समाप्त हो चला है। एक समय था जब पेयजल व सिचाई का मुख्य स्रोत कुआं हुआ करते थे। लेकिन समय के बदलाव के साथ कुओं की अनदेखी इस तरह से भारी पड़ रही है। अगर लोगों ने ध्यान नही दिया तो इन कुओं का नामोनिशान तक नही रहेगा। कस्बा में बने तमाम कुएं ढहने की कगार पर पहुंच चुके है। या यूँ कहें कि ज्यादातर जमींदोज हो गए है।  कस्बा के गुडमंडी में सड़क के बीचो-बीच खुला और जर्जर कुआं हादसे का कारण बन सकता है। कुएं के समाने ही रहने वाले दीप चन्द्र बताते है कि कुआ करीब 50 साल पुराना है। अब इस देखकर कोई नही करता है। कुएं को ढंका भी नही गया है। चारों तरफ बाउंड्री भी नही है। रमन गुप्ता का कहना है कि कुएं की सफाई कराकर उसे संरक्षित कर दिया जाएं उसके ऊपर जालियां लगा दी जाए ताकि खतरा कम हो। धीरज का कहना है कि प्राचीन कुएं हमारी संस्कृति और परंपराओं में कुओं की बड़ी महत्ता थी। कस्बा में शादी-विवाह और बच्चे के जन्म पर भी कुआं पूजन की परंपरा आज भी कायम है। लेकिन बदलते परिवेश के चलते मौजूदा कुएं अंतिम सांसे गिन रहै। शासन द्वारा भी कुओं का जीर्णोद्धार का कार्य नही कराया जा रहा है। आने वाले समय में यह कुएं केवल कागजों के सहारे ही देखने को मिलेंगे। कस्बा में ऐसे कुंए हैं जिनका प्रयोग नहीं हो रहा और वे बिना बाउंड्रीवॉल के पड़े हुए हैं। सड़कों के आसपास पुराने कुंए सबसे ज्यादा जानलेवा बन रहे हैं। इनकी बाउंड्रीवॉल हो जाए या इनको बंद कर दिया जाए तो काफी हद तक हादसों को रोका जा सकता है। प्रचीन कुंओं का जीर्णोद्धार और इनकी बाउंड्रीवॉल कराने की मांग भी उठने लगी है।

 

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