चंबल से IPS तक का सफर , हारा वही जो लड़ा नहीं 12th fail Movie

भिलाई। न्यू वसंत टॉकीज़ (भिलाई) शहर का एक मात्र सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल है जहां “आधुनिक २०००० लूमिन वाले लेज़र प्रोजेक्टर “ से फ़िल्मों का प्रदर्शन किया जाता है, जहां कार और २ व्हिलर्स पार्किंग की पर्याप्त सुविधा है , न्यूनतम टिकट दर है और हॉल में सभी कुशन वाली चेयर्स है.
न्यू वसंत टॉकीज़ में “ १९४२ अ लव स्टोरी , परिंदा और मिशन कश्मीर “ जैसी अप्रतिम फ़िल्मों के निर्माता विधु विनोद जी चोपड़ा की “ IAS और IPS “ में दाख़िला पाने की कोशिश करने वाले विद्यार्थियों पर बनी फ़िल्म “ बारवी फेल “ का प्रदर्शन किया जा रहा है.
इस अप्रतिम फ़िल्म को देखने हमारे “ विशेष अतिथि “ बनकर आप आमंत्रित है. आप के लिये “डायमंड क्लास में सिट नंबर्स-आरक्षित रखी है. कृपया पधारे और मुझे अपने आने की अग्रिम सुचना दे. और इस पर स्टूडेंट्स मोटिवेशन और जागरूकता पर अपनी खबर बनाये
ये एक ऐसी कहानी है जिसमें चंबल से आए एक आशिक के पास खाने को पैसे नहीं हैं। रहने के लिए सिर पर छत नहीं है। संघ लोक सेवा आयोग यानी कि यूपीएससी का यू भी नहीं पता है और वह इश्क कर बैठता है एक सुंदर सी, सलोनी सी और मन की मजबूत सी एक पहाड़न से। इस प्रेम कहानी पर बनी है फिल्म ’12वीं फेल’।
कहानी उस 12th फेल IPS अफसर की, जिसने भिखारियों संग सोकर गुजारी रातें, मेहनत के दम पर पाई मंजिल
असली कामयाबी उसी शख्स को मिलती है जो अपनी असफलताओं से हारता नहीं बल्कि पहले से दुगनी ताकत लगा कर उनका सामना करता है. ऐसा करना हर किसी के बस की बात नहीं, ज्यादातर लोग अपनी असफलताओं से हार मान लेते. आज की कहानी एक ऐसी शख्सियत की है जिसने असफलताओं का ना केवल डट कर मुकाबला किया बल्कि उन्हें हरा कर सफलता को अपने नाम भी किया.
हम यहां आपको कहानी बता रहे हैं IPS अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की. मनोज आज भले ही एक अधिकारी हैं लेकिन उनके लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले मनोज ने बचपन से ही IAS अधिकारी बनने का सपना देखा था. सपना तो उन्होंने देख लिया था लेकिन 12th क्लास तक इस सपने के पूरा होने की संभावना दूर दूर तक नहीं दिख रही थी. 9th और 10th क्लास में मनोज थर्ड डिवीजन से पास हुए. वहीं 12th में तो वह फेल हो गए. ऐसे कमजोर विद्यार्थी पर भला किसी को कैसे भरोसा होता कि वह यूपीएससी जैसा मुश्किल एग्जाम क्लियर कर पाएगा लेकिन मनोज को खुद पर भरोसा था. वो अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे.
मनोज ने ट्वेल्थ फेल नाम से एक किताब लिखी है. इस किताब में उन्होंने अपनी कहानी बयान करते हुए बताया है कि पढ़ाई के दौरान उन्हें जीवन में चल रहे कई संघर्षों से लड़ना पड़ा था. इनमें सबसे बड़ा संघर्ष था आर्थिक संकट. उन्होंने बताया है कि उस दौरान उनके सर पर छत तक नहीं थी. जिस वजह से उन्हें भिखारियों के साथ भी सोना पड़ा था. इस दौरान उन्होंने ग्वालियर में टेंपो चलाने से लेकर दिल्ली में लाइब्रेरी के चपरासी तक का काम किया. लाइब्रेरी में काम करते हुए मनोज ने कई मशहूर लेखकों की किताबें पढ़ीं और उनकी लिखी बातों पर अमल किया.
आईपीएस मनोज शर्मा ने केवल किताब में ही अपनी कहानी नहीं लिखी बल्कि उनकी ज़िंदगी खुद किसी मूवी से कम नहीं थी. इनकी ज़िंदगी ऐसी फिल्म की तरह रही जिसमें प्यार की भी अहम भूमिका थी. दरअसल, 12th में पढ़ रहे मनोज अपनी ही क्लास की एक लड़की पर दिल हार बैठे थे. मनोज पहले ही 12th में फेल हो चुके थे और उन्हें ये डर लगा रहता था कि उनके फेलियर को देख कर लड़की उनके प्रस्ताव को ठुकरा देगी. इसी डर से वो उस लड़की से अपने प्यार का इजहार नहीं कर पा रहे थे.
जब मनोज के लिए इंतजार की हद हो गई तब उन्होंने आखिरकार अपने दिल की बात उस लड़की के सामने रख ही दी. उन्होंने लड़की से इस बात का वादा किया कि अगर वो उनका प्रेम प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है और उनका साथ देती है तो वो पूरी दुनिया पलट देंगे. हालांकि ये बयान थोड़ा बचकाना है लेकिन शायद ऐसा कहते हुए मनोज को खुद पर पूरा भरोसा था. यही वजह थी कि उन्होंने खूब मेहनत की और अपनी कही हर बात को सच कर दिखाया. यूपीएससी एग्जाम क्लियर करने के बाद मनोज कुमार शर्मा साल 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस बने।
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