भगवान को देखने के लिए सूरदास और मीरा की आंखे चाहिए-देवी रिचा मिश्रा
दीपक कुमार। विषेश संवाददाता

भिलाई/भिलाई। सांसद विजय बघेल के नेतृत्व में जयंती स्टेडियम में आयोजित हनुमत महायज्ञ एवं कथा में बुधवार को अंतराष्ट्रीय कथा वाचक देवी रिचा मिश्रा ने भगवान श्री राम की कथा सुनाई।
रामचरित मानस के दोहे पाठ करते हुए उसका अर्थ भी बताया। और जीवन का सार भी।
इस बीच जय जय श्री राम के जयकारे लगाए गई। जब देवी रिचा ने प्रभु के भक्तगीत गाए तो भक्त भी प्रभू की भक्ति में झूम उठे। चारो ओर सिर्फ भक्ति संगीत बज रही थी और लोग मन लगाकर ज्ञानगंगा का सरपान कर रहे है। आगे देवी रिचा ने व्यास पीठ से भगवान की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री राम और लक्ष्मण वन में ऋषि मुख पर्वत की ओर जा रहे है। उन्हें पर्वत की ओर आता देख सुग्रीव डर गए। वे उन्हें नहीं पहचान पाए कि वे कौन है और यहां क्यों आ रहे हैं। तब देवी रिचा बताती हैकि भगवान स्वयं सुग्रीव की ओर आ रहे हैं, लेकिन वह प्रभु को नहीं पहचान पा रहे। ऐसा ही हमारे जीवन में भी होता है। हर रोज एक ना एक बार प्रभु श्रीराम हमें किसी ना किसी रूप में मिलते है। लेकिन हम ही है जो उन्हें पहचान नहीं पाते। यह हमारी कमी है। उन्हें देखने के लिए जानने के लिए हमें सूरदास और मीरा जैसी आंखे चाहिए। तब हम भगवान को देख पाएंगे। भक्त के भाव होने चाहिए। हृदय संसारिक माया से पूरी तरह से खाली होना चाहिए। आगे उन्होंने बताया कि मीरा मात्र 5 साल की थी। तब उसकी सहेली की शादी हो रही थी।मीरा ने अपनी मां से पूछा वह जो घोड़े में आ रहा है वह कौन है। तब उसकी मां ने बताया कि वह तेरी सहेली का दूल्हा है। तब मीरा रोने लगी और जिद पकड़ ली कि मेरा दूल्हा कहां है। देवी रिचा ने बताया कि तीन हट बाल हट, जोगी हट और स्त्री हट होता है। एक बार हट पकड़ ली तो पूरा करके ही मानते है। मीरा जिद पकड़ ली तो उसकी मां उसे गिरधर गोपाल के पास ले गई और कह दी की यही तेरा दूल्हा है। तब से उसने भगवान कृष्ण को ही अपना सब कुछ मान लिया। हालाकि उन्होंने सभी माताओं से कहा कि यह कथा सूनने और समझने को अच्छी है पर बच्चों से कभी झूठ नहीं कहना चाहिए। आगे उन्होंन रामचरित मानक का पाठ करते हुए कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि जंगल में हनुमान जी श्रीराम जी के पास पहुंचे। उन्हें देख कर वे पहचान गए। बार-बार भगवान को देखे और अपने हृदय में देखे। भगवान ने पूछा क्या कर रहे हो, तो हनुमान जी ने कहा फोटो मिला रहा हूं। जो मेरे हृदय के अंदर है वहीं बाहर है। हनुमान जी ने प्रभु से कहा आप को हमारे साथ चलना पड़ेगा। श्रीराम ने कहा क्यो तो हनुमान ने कहा क्योकि वह आप का भक्त है। इसलिए आप भले भगवान के पास जाओ या ना जाओ पर आप के मन में भक्ति है तो भगवान खुद आप के पास आ जाएंगे। कथा के दौरान सांसद विजय बघेल, साजा विधायक ईश्वर साहू पूरे समय उपस्थित रहे।
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